जयपुर। राजस्थान की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने वाले सुप्रसिद्ध लोक कलाकार एवं उनका धोद बैंड 18 जून को फ्रांस की राजधानी में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘बोंजूर मोदी’ कार्यक्रम में विशेष प्रस्तुति देंगे। यह आयोजन भारत के प्रधानमंत्री के सम्मान में आयोजित किया जा रहा है और भारतीय संस्कृति व भारत-फ्रांस मैत्री का महत्वपूर्ण उत्सव माना जा रहा है।
यह कार्यक्रम पेरिस के प्रसिद्ध कॉन्सर्ट हॉल में आयोजित होगा। रहीस भारती और धोद बैंड का चयन भारतीय दूतावास, पेरिस द्वारा किया गया है, जिसे राजस्थान और भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
20 लोक कलाकार यूरोप में बिखेर रहे संस्कृति की छटा
वर्तमान में धोद बैंड अपने यूरोप टूर-2026 पर है। दल में राजस्थान के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े करीब 20 लोक कलाकार शामिल हैं, जो फ्रांस और यूरोप के विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में भारतीय लोक संगीत और परंपराओं की प्रस्तुति दे रहे हैं।
119 देशों तक पहुंची राजस्थान की लोकधुन
पिछले 26 वर्षों से सक्रिय रहीस भारती और धोद बैंड विश्व के 119 से अधिक देशों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। राजस्थान से निकलकर वैश्विक मंचों तक पहुंचे इस समूह ने भारतीय लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह दल हर वर्ष लगभग छह से सात महीने विदेशों में रहकर भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करता है।
रहीस भारती के प्रयासों से अब तक 700 से अधिक लोक कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है। धोद बैंड के माध्यम से लंगा, मांगणियार, कालबेलिया, ढाढ़ी, दमामी और राणा समुदायों सहित कई पारंपरिक लोक कला विधाओं को वैश्विक पहचान मिली है।
यूरोप के कई देशों में भी होंगे कार्यक्रम
‘बोंजूर मोदी’ कार्यक्रम के बाद धोद बैंड को पुर्तगाल, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड, इटली और स्पेन में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संगीत महोत्सवों और सांस्कृतिक समारोहों में भी प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया है।
रहीस भारती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में प्रस्तुति देना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि यह अवसर केवल धोद बैंड का नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति, लोक कलाकारों और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।