जयपुर। संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि संवेदनाओं, संस्कारों और साधना का ऐसा माध्यम है जो व्यक्ति को समाज से जोड़ता है। इसी विचार को अपने जीवन में आत्मसात कर शिक्षा, संगीत, शोध और पत्रकारिता के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाने वाली शख्सियत हैं डॉ. सोनिका पारीक। अपनी बहुमुखी प्रतिभा, अकादमिक उत्कृष्टता और संगीत साधना के बल पर उन्होंने प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान अर्जित किया है।
बचपन से ही संगीत के प्रति था विशेष लगाव
17 जून 1982 को जयपुर में जन्मी डॉ. सोनिका पारीक बचपन से ही संगीत के प्रति गहरी रुचि रखती थीं। उनके पिता उनके पिता रमेश चंद्र पारीक और माता शशि पारीक ने हमेशा उन्हें शिक्षा और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। विद्यालयी जीवन से ही उनकी प्रतिभा सामने आने लगी थी। कक्षा आठवीं से ही उन्होंने दूरदर्शन के विभिन्न सांस्कृतिक और संगीत कार्यक्रमों में प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था। उनकी मधुर आवाज और मंच संचालन की क्षमता ने उन्हें कम उम्र में ही पहचान दिला दी।
शिक्षा में उत्कृष्टता की मिसाल
डॉ. पारीक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अजमेर बोर्ड से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जयपुर के प्रतिष्ठित कनोडिया महाविद्यालय से स्नातक की उपाधि हासिल की। उच्च शिक्षा के प्रति उनकी लगन लगातार बढ़ती गई और उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से तीन अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर डिग्रियां प्राप्त कीं—
- एम.ए. संगीत (वोकल)
- एम.ए. लोक प्रशासन
- एम.ए. समाजशास्त्र
ज्ञान की इस यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बनस्थली विद्यापीठ से संगीत चिकित्सा (Music Therapy) विषय में पीएच.डी. की उपाधि अर्जित की। संगीत और स्वास्थ्य के संबंधों पर किया गया उनका शोध काफी चर्चित रहा।
इतना ही नहीं, बदलते दौर की जरूरतों को समझते हुए उन्होंने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा से बीजेएमसी (बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन) और एमजेएमसी (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन) की डिग्रियां भी प्राप्त कीं।
शिक्षा जगत में महत्वपूर्ण योगदान
डॉ. सोनिका पारीक ने अपने करियर की शुरुआत संगीत शिक्षिका के रूप में की। उन्होंने वीणा वादिनी विद्यालय, सांगानेर में लगभग दो वर्षों तक संगीत शिक्षण का कार्य किया। इसके बाद वे नीरजा मोदी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मानसरोवर में संगीत शिक्षिका रहीं।
शिक्षा के क्षेत्र में उनके अनुभव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें ईजी स्टेप विद्यालय में प्रधानाध्यापिका का दायित्व भी सौंपा गया। इसके पश्चात उन्होंने महेश्वरी गर्ल्स कॉलेज, प्रताप नगर में व्याख्याता (Lecturer) के रूप में सेवाएं दीं।
वर्तमान में वे एस.एस.जी. पारीक स्नातकोत्तर शिक्षा महाविद्यालय एवं बी.एड. कॉलेज, जयपुर में सहायक आचार्य (Assistant Professor) के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे भावी शिक्षकों और विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार और व्यक्तित्व विकास का मार्गदर्शन भी प्रदान कर रही हैं।
संगीत की दुनिया में बनाई अलग पहचान
संगीत के क्षेत्र में डॉ. पारीक की उपलब्धियां बेहद प्रभावशाली हैं। उन्होंने कई प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी गायकी का प्रदर्शन किया है। वर्ष 2008 में दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित “वॉइस ऑफ राजस्थान-3” प्रतियोगिता में वे श्रेष्ठ प्रतिभागियों में शामिल रहीं।
उनकी आवाज विभिन्न संगीत कंपनियों के एल्बमों में सुनाई दे चुकी है। उन्होंने—
- Tips India Ltd.
- Veena Cassettes
- BSB
- श्री बाबा शंकर एवं अन्य संगीत कंपनियों
के लिए भजन, गीत और संगीत एल्बम रिकॉर्ड किए हैं।
इसके अलावा जयपुर दूरदर्शन पर प्रसारित लोकप्रिय कार्यक्रम “आपके संग” के आठ एपिसोड में उन्होंने एंकरिंग कर अपनी प्रस्तुति कौशल का परिचय दिया।
शोध और संगीत चिकित्सा में विशेष योगदान
डॉ. सोनिका पारीक का शोध कार्य उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। संगीत चिकित्सा पर किए गए उनके शोध को इतनी सराहना मिली कि जयपुर दूरदर्शन ने उन्हें विशेष चर्चा और साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया। यह कार्यक्रम लगभग 30 मिनट तक प्रसारित हुआ और राजस्थान के प्रमुख समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ।
संगीत चिकित्सा पर आधारित उनकी शोध पुस्तक का विमोचन वर्ष 2011 में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा किया गया। यह उनके शोध की गुणवत्ता और सामाजिक उपयोगिता का प्रमाण है।
लेखन और प्रकाशन में भी सक्रिय
डॉ. पारीक ने संगीत और समाजशास्त्र विषयों पर कई पुस्तकें लिखी हैं। उनकी पुस्तकों का उपयोग विद्यार्थियों और शोधार्थियों द्वारा संदर्भ सामग्री के रूप में किया जाता है। उन्होंने टीडीसी प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए संगीत विषय की पाठ्य पुस्तकें भी तैयार कीं, जो वर्ष 2016 में प्रकाशित हुईं।
पुरस्कार और सम्मान
डॉ. सोनिका पारीक को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- टैलेंट स्टूडेंट अवार्ड (2010)
- राजस्थान संगीत विभूषण अवार्ड (2010)
- टैलेंट स्टूडेंट अवार्ड – विद्याधर नगर विकास समिति
- राजस्थान के सितारे सम्मान (2011)
- जीना इसी का नाम है सम्मान (2016)
- वूमेन अचीवमेंट अवार्ड (2016)
- म्यूजिक थेरेपिस्ट सम्मान
- विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मान
पत्रकारिता से भी जुड़ाव
पत्रकारिता और जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद डॉ. पारीक ने मीडिया और लेखन क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई। शिक्षा, संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विषयों पर उनकी गहरी समझ उन्हें एक संवेदनशील शिक्षाविद और विचारक के रूप में स्थापित करती है।
प्रेरणा की मिसाल
डॉ. सोनिका पारीक का जीवन इस बात का उदाहरण है कि यदि व्यक्ति में सीखने की जिज्ञासा, मेहनत और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण हो तो वह एक साथ कई क्षेत्रों में सफलता हासिल कर सकता है। संगीत की मधुरता, शिक्षा की गंभीरता, शोध की गहराई और पत्रकारिता की सजगता—इन सभी गुणों का अद्भुत संगम उनके व्यक्तित्व में दिखाई देता है।
आज वे हजारों विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल पारीक समाज बल्कि पूरे राजस्थान के लिए गर्व का विषय हैं। उनकी जीवन यात्रा आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि प्रतिभा तभी सार्थक होती है, जब उसे निरंतर परिश्रम और समर्पण का साथ मिले।






