जयपुर, 19 जून। बदलते औद्योगिक परिदृश्य में श्रम कानूनों को सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में किए गए सुधार उद्योगों के लिए नई संभावनाएं लेकर आए हैं। नए लेबर कोड्स को समझना और उनका प्रभावी क्रियान्वयन केवल कानूनी अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठनों की कार्यक्षमता, जोखिम प्रबंधन और भविष्य के लिए तैयार कार्यस्थल के निर्माण से भी जुड़ा हुआ है।
यह बात PwC इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर गौरव वर्मा ने कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) राजस्थान द्वारा जयपुर में आयोजित नए लेबर कोड्स पर विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा 29 श्रम कानूनों को समाहित कर चार प्रमुख लेबर कोड्स — वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों से संबंधित कोड्स — के रूप में सरल बनाने का प्रयास किया गया है। इन सुधारों का सीधा प्रभाव संगठनों की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों के हितों, औद्योगिक संबंधों और गवर्नेंस ढांचे पर पड़ता है।
गौरव वर्मा ने कहा कि प्रत्येक संगठन के लिए इन लेबर कोड्स की गहन समझ आवश्यक है, ताकि वे नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ-साथ एक निष्पक्ष, पारदर्शी और आधुनिक कार्य संस्कृति विकसित कर सकें।
CII राजस्थान के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड नितिन गुप्ता ने बताया कि सत्र का उद्देश्य उद्योगों को नए लेबर कोड्स की विस्तृत जानकारी प्रदान करना और उनसे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करना था।
कार्यक्रम के अंत में MSME एवं पॉलिसी एडवोकेसी पैनल के को-कन्वीनर तथा शेरडेल परफेक्ट स्प्रिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अर्जुन बहेती ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
सत्र में प्रदेश की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों एवं संस्थानों से जुड़े 90 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया और श्रम सुधारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की।




