जयपुर, 29 जून। राष्ट्रीय पशुपालक संघ एवं डीएनटी संघर्ष समिति ने जयपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में 1 जुलाई से "महा-पड़ाव" शुरू करने की घोषणा की। समिति ने कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
समिति के अध्यक्ष लालजी राईका ने कहा कि डीएनटी (डीनोटिफाइड एवं घुमंतू) समाजों के लिए 10 प्रतिशत अलग आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका दावा है कि यह आरक्षण एससी और ओबीसी वर्ग के भीतर उपवर्गीकरण के माध्यम से दिया जा सकता है, जिससे 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन भी नहीं होगा। उन्होंने विभिन्न आयोगों और न्यायालयों के निर्णयों का हवाला देते हुए राज्य सरकार से इस दिशा में कार्रवाई की मांग की।
समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि बालराई महापड़ाव के बाद सरकार के साथ हुई वार्ता में मांगों पर विचार का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कई महीने बीतने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों, गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई।
समिति ने बताया कि राज्यभर में "जेल भरो आंदोलन", पैदल मार्च और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के माध्यम से सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। इसी के चलते 1 जुलाई से जयपुर में महा-पड़ाव का निर्णय लिया गया है।
समिति की प्रमुख मांगों में डीएनटी समाज को 10 प्रतिशत आरक्षण, आरक्षण का उपवर्गीकरण, जातिगत विसंगतियों का समाधान, जमीन एवं आवास के लिए पट्टों की व्यवस्था तथा 11 सूत्रीय मांगों को लागू करना शामिल है। समिति ने कहा कि अब वह मुख्यमंत्री स्तर पर ही वार्ता करेगी।
